खुशी कुलवाल सुसाइड केस से जुड़े डीसी बोर्ड के एक सदस्य संघ के नाम का कर रहे दुरुपयोग, नागपुर तक शिकायत पहुंचाने की तैयारी.
इंदौर। पूरे देश में ख्यात मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान डेली कॉलेज का वर्तमान संचालक मंडल यानी डीसी बोर्ड अपने मनमाने फैसले से इसका नाम डुबोने में लगा है। पैरेंट्स और ओल्ड डेलियन की आवाज दबाने के लिए आरएसएस के नाम का सहारा लिया जा रहा है। चर्चित खुशी कुलवाल केस से जुड़े वर्तमान डीसी बोर्ड के एक सदस्य संघ का नाम बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी शिकायत नागपुर तक पहुंचाने की तैयारी है।
उल्लेखनीय है कि पिछले लंबे समय से डेली कॉलेज में शिक्षा से लेकर हर तरह की गुणवत्ता में कमी की शिकायतें आ रही हैं। इसका कारण वर्तमान डीसी बोर्ड की मनमानी है। बोर्ड बिना एजीएम कराए मनमाने स्तर पर फैसले ले रहा है, जिसके कारण स्टूडेंट्स का नुकसान हो रहा है। बोर्ड की मनमानी का आलम यह है कि इसने अपना कार्यकाल तक बढ़ा लिया और चुनाव को लगातार टालने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं संस्थान के संविधान बदलने के प्रयास भी हो रहे हैं ताकि यही बोर्ड लंबे समय तक अपनी मनमानी करता रहे।
संघ से जुड़े व्यक्ति को 30 करोड़ का ठेका
सूत्रों के अनुसार संघ से जुड़े एक व्यक्ति को डेली कॉलेज में करीब 30 करोड़ का ठेका दे दिया गया है। इसके बाद डीसी बोर्ड इनके नाम का इस्तेमाल करने लगा। पैरेंट्स और शिकायत करने वाले सदस्यों को संघ के नाम से धमकी दी जाने लगी। इतना ही नहीं सरकारी विभागों में भी संघ के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
संघ के एक बड़े पदाधिकारी को भी जोड़ा
डीसी बोर्ड के विवादित सदस्य ने संघ के एक बड़े पदाधिकारी को भी डेली कॉलेज से जोड़ा। वे यहां संघ की गतिविधियां आदि भी चलाते हैं। अब उनका इस्तेमाल यहां का संविधान बदलने के लिए भी हो रहा है। इतना ही नहीं उनके नाम पर कई सरकारी अधिकारियों को भी धमकाया जा रहा है। शायद उस पदाधिकारी को यह भी पता नहीं कि वे डीसी बोर्ड के जिस पदाधिकारी के साथ जुड़े हैं, उसका नाम खुशी कुलवाल सुसाइड केस में बदनाम हो चुका है।
सीएम से लेकर संघ तक पहुंच रही शिकायत
कई पैरेंट्स, कुछ डीसी बोर्ड के मेंबर तथा कई ओल्ड डेलियन संस्थान में वर्तमान में चल रही गतिविधियों की शिकायतें सीएम से लेकर संघ तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि नागपुर स्थित संघ मुख्यालय से मिलने का समय मांगा गया है। समय मिलते ही कुछ पैरेंट्स तथा कुछ मेंबर संघ मुख्यालय जाकर यह बताने वाले हैं कि किस तरह डेली कॉलेज के एक पदाधिकारी संघ के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसी मामले में कुछ लोग सीएम से मिलकर अपनी बात रख चुके हैं।
एजीएम के बिना ही हो रहे सारे निर्णय
डेली कॉलेज का संचालन बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा किया जाता है। यह मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड संस्था है। इसके तहत बिना एजीएम कोई फैसला नहीं हो सकता, लेकिन डीसी बोर्ड कोई भी सरकारी नियम नहीं मानता। एजीएम में सारे सदस्यों को बुलाकर फैसले लेने का प्रावधान है, लेकिन बोर्ड के 9 सदस्य ही खुद को एजीएम मानते हैं। कायदे से बोर्ड को डेली कॉलेज का पूरा लेखा-जोखा फर्म्स एंड सोसायटी में जमा कराना चाहिए, लेकिन सूत्र बताते हैं कि ऐसा नहीं होता।
शिक्षा की गुणवत्ता बिगड़ने से खराब हो रहे रिजल्ट
डेली कॉलेज में लगभग 1650 छात्र शिक्षा प्राप्त करते हैं जिसमे लड़के, लड़कियां दोनो शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों से डेली कॉलेज की छवि लगातार खराब हुई है एवं शैक्षणिक स्तर में गिरावट आई है। इसके कारण बोर्डिंग एडमिशन में जबरजस्त कमी आई है। 70% से अधिक छात्रों को बाहर ट्यूशन का सहारा लेना पर रहा है। यही वजह है कि 10वीं-12वींड के बोर्ड का रिजल्ट काफी खराब रहा। एमरल्ड हाईट्स सहित कई दूसरे संस्थानों के बच्चों डेली कॉलेज के बच्चों से आगे निकल गए।
डॉ.बिन्द्रा के प्रिंसिपल बनने के बाद और गिरी गुणवत्ता
डॉ. गुनमीत बिंद्रा के प्रिंसिपल बनने के बाद यहां शिक्षा की गुणवत्ता और बिगड़ गई है। डॉ.बिंद्रा दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजपुरा की ट्र्स्टी भी हैं। जब से वे डेली कॉलेज आई हैं, तब से डीपीएस राजपुरा में डेली कॉलेज के कई प्रोग्राम लागू किए जा रहे हैं। यहां तक कि गेस्ट भी दोनों जगह एक ही आने लगे। उनका पूरा ध्यान डीपीएस राजपुरा पर ही रहता है, इसलिए डेली कॉलेज फिसड्डी होता जा रहा है।