अमेरिकी ईबी-5 वीजा में कटौती से भारतीय निवेशकों को झटका, ग्रीन कार्ड का इंतजार और लंबा.
अमेरिकी ईबी-5 वीजा में कटौती से भारतीय निवेशकों को झटका, ग्रीन कार्ड का इंतजार और लंबा
अमेरिका की बदलती आव्रजन नीतियों के चलते पहले से ही चिंतित अप्रवासी भारतीयों को एक और झटका लगा है। ट्रंप प्रशासन के नए फैसले ने हजारों भारतीयों के अमेरिका में बसने और ग्रीन कार्ड पाने के सपने को कठिन बना दिया है।

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा मई 2025 के लिए जारी वीजा बुलेटिन में भारतीय नागरिकों के लिए ईबी-5 वीजा श्रेणी में कटौती की गई है। अब ईबी-5 अनारक्षित वीजा श्रेणी के लिए आवेदन की वेटिंग कट-ऑफ तिथि एक मई 2019 कर दी गई है, जबकि पहले यह एक नवंबर 2019 थी। इसका मतलब है कि एक मई 2019 के बाद आवेदन करने वाले भारतीयों को अब और अधिक इंतजार करना पड़ेगा।
बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि भारत में ईबी-5 वीजा की उच्च मांग, अन्य देशों में भी वीजा की बढ़ती मांग और सीमित संख्या के उपयोग के कारण, भारत के लिए 'फाइनल एक्शन डेट' को पीछे करना पड़ा है। यदि मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो अन्य देशों के लिए भी अंतिम कार्रवाई की तिथि निर्धारित की जा सकती है।
ईबी वीजा की सीमा और नियम
आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम (INA) के तहत:
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परिवार-प्रायोजित वरीयता वीजा की वार्षिक सीमा: 2,26,000
-
रोजगार-आधारित वरीयता वीजा की विश्वव्यापी सीमा: 1,40,000
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प्रति देश सीमा (सभी वरीयताओं के लिए): कुल संख्या का 7% यानी 25,620
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आश्रित क्षेत्रों के लिए सीमा: 2% यानी 7,320
ईबी-1 और ईबी-2 में राहत
बुलेटिन में कहा गया है कि ईबी-1 और ईबी-2 वीजा श्रेणियों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मई 2025 में अमेरिका विदेशी नागरिकों से रोजगार-आधारित स्थिति समायोजन के आवेदन स्वीकार करेगा, बशर्ते उनकी प्राथमिकता तिथि निर्धारित कट-ऑफ तिथि से पहले की हो।
क्या है ईबी-5 वीजा?
ईबी-5 एक अमेरिकी अप्रवासी निवेशक वीजा है, जो विदेशी नागरिकों और उनके परिवारों को न्यूनतम निवेश के बदले संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) प्राप्त करने की अनुमति देता है। निवेश को किसी योग्य अमेरिकी व्यवसाय या क्षेत्रीय केंद्र परियोजना में लगाया जाना चाहिए, जिससे कम से कम 10 रेगुलर नौकरियां उत्पन्न हों।
इस बदलाव से उन भारतीय निवेशकों को बड़ा झटका लगा है, जो ईबी-5 वीजा के माध्यम से अमेरिका में बसने की योजना बना रहे थे। अब उन्हें लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ेगा, जिससे ग्रीन कार्ड मिलने की प्रक्रिया और भी जटिल हो गई है।
अमेरिकी ईबी-5 वीजा में कटौती से भारतीय निवेशकों को झटका, ग्रीन कार्ड का इंतजार और लंबा
अमेरिका की बदलती आव्रजन नीतियों के चलते पहले से ही चिंतित अप्रवासी भारतीयों को एक और झटका लगा है। ट्रंप प्रशासन के नए फैसले ने हजारों भारतीयों के अमेरिका में बसने और ग्रीन कार्ड पाने के सपने को कठिन बना दिया है।
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा मई 2025 के लिए जारी वीजा बुलेटिन में भारतीय नागरिकों के लिए ईबी-5 वीजा श्रेणी में कटौती की गई है। अब ईबी-5 अनारक्षित वीजा श्रेणी के लिए आवेदन की वेटिंग कट-ऑफ तिथि एक मई 2019 कर दी गई है, जबकि पहले यह एक नवंबर 2019 थी। इसका मतलब है कि एक मई 2019 के बाद आवेदन करने वाले भारतीयों को अब और अधिक इंतजार करना पड़ेगा।
बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि भारत में ईबी-5 वीजा की उच्च मांग, अन्य देशों में भी वीजा की बढ़ती मांग और सीमित संख्या के उपयोग के कारण, भारत के लिए 'फाइनल एक्शन डेट' को पीछे करना पड़ा है। यदि मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो अन्य देशों के लिए भी अंतिम कार्रवाई की तिथि निर्धारित की जा सकती है।
ईबी वीजा की सीमा और नियम
आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम (INA) के तहत:
परिवार-प्रायोजित वरीयता वीजा की वार्षिक सीमा: 2,26,000
रोजगार-आधारित वरीयता वीजा की विश्वव्यापी सीमा: 1,40,000
प्रति देश सीमा (सभी वरीयताओं के लिए): कुल संख्या का 7% यानी 25,620
आश्रित क्षेत्रों के लिए सीमा: 2% यानी 7,320
ईबी-1 और ईबी-2 में राहत
बुलेटिन में कहा गया है कि ईबी-1 और ईबी-2 वीजा श्रेणियों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मई 2025 में अमेरिका विदेशी नागरिकों से रोजगार-आधारित स्थिति समायोजन के आवेदन स्वीकार करेगा, बशर्ते उनकी प्राथमिकता तिथि निर्धारित कट-ऑफ तिथि से पहले की हो।
क्या है ईबी-5 वीजा?
ईबी-5 एक अमेरिकी अप्रवासी निवेशक वीजा है, जो विदेशी नागरिकों और उनके परिवारों को न्यूनतम निवेश के बदले संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) प्राप्त करने की अनुमति देता है। निवेश को किसी योग्य अमेरिकी व्यवसाय या क्षेत्रीय केंद्र परियोजना में लगाया जाना चाहिए, जिससे कम से कम 10 रेगुलर नौकरियां उत्पन्न हों।
इस बदलाव से उन भारतीय निवेशकों को बड़ा झटका लगा है, जो ईबी-5 वीजा के माध्यम से अमेरिका में बसने की योजना बना रहे थे। अब उन्हें लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ेगा, जिससे ग्रीन कार्ड मिलने की प्रक्रिया और भी जटिल हो गई है।