नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित होते ही इंदौर की नई ‘चौकड़ी’ तय, शहर में लगे होर्डिंग बता रहे हैं आगे कैसी होगी ‘लड़ाई’.
इंदौर। मध्यप्रदेश में भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ ही इंदौर की राजनीतिक बिसात नए समीकरणों के साथ बिछ गई है। शहर में लगे कुछ होर्डिंग यह बता रहे हैं कि आगे कौन-कौन से मोहरे साथ होंगे और किस-किस के बीच होगा शह और मात का खेल।
शहर में कई स्थानों पर एक होर्डिंग दिखाई दे रहा है। इसमें सीएम डॉ.मोहन यादव और भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की तस्वीर है। उनके साथ पूर्व नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, विधायक मनोज पटेल और हिंद रक्षक संगठन के सर्वेसर्वा एकलव्य सिंह गौड़ की तस्वीर है। वैसे यह होर्डिंग तो नए प्रदेश अध्यक्ष को बधाई देने के लिए है, लेकिन इससे स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई है। ये होर्डिंग सावन सोनकर मित्र मंडल की तरफ से लगाए गए हैं, लेकिन इसने मित्रों की सूची भी उजागर कर दी है।
इंदौर में एकतरफा नहीं चलेगी राजनीति
इस होर्डिंग से इंदौर की राजनीति में खुद को सर्वेसर्वा समझने वाले एक गुट को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यहां एकतरफा राजनीति अब नहीं चलेगी। अगर ऐसी कोशिश की गई तो उसका जवाब देने के लिए यह चौकड़ी तैयार है। यह होर्डिंग यह भी बता रहा है कि गौरव रणदिवे अभी भी इंदौर में पूरी ताकत के साथ मौजूद हैं और मनोज पटेल भी बिना सहारे के नहीं खड़े हैं।
यूं ही नहीं सामने आ गई है यह चौकड़ी
भाजपा में कहा तो यह भी जा रहा है कि सीएम के चहेते नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के बाद पूरे प्रदेश में जब समीकरण बदलेंगे, तब यह चौकड़ी दसरों से आगे होगी। खुद सीएम इंदौर के बिगड़ते राजनीतिक संतुलन को संतुलित करने की कोशिश लंबे समय से कर रहे हैं। हो सकता है इस चौकड़ी का खुलकर सामने आना इसी रणनीति का हिस्सा हो।
फाइनल पिक्चर अभी बाकी है
यह भी चर्चा है कि इंदौर में एक गुट विशेष द्वारा हावी होने की कोशिशों के बीच यह इस नए राजनीतिक समीकरण की खिचड़ी लंबे समय से पक रही है। ताई-भाई के गुट के बाद कोई घोषित गुट आमने-सामने नहीं था। जब पुष्यमित्र भार्गव महापौर बने तो ऐसा लगा कि एक नया गुट शहर में खड़ा होगा, लेकिन वे भी उसी पुराने गुट में जाकर जमा हो गए जो शुरू से इंदौर पर अपना बर्चस्व रखना चाहता था। ऐसे में होर्डिंग पर लगे ये चेहरे लगातार यह कोशिश करते रहे कि इंदौर में भाजपा एकतरफा न हो। अब यह खुलकर एक पोस्टर के रूप में सामने आया है। आगे चाहे कुछ भी हो, लेकिन यह तो तय है कि इंदौर भाजपा में अगर किसी ने वर्चस्व कायम करने की कोशिश की तो लड़ाई दिलचस्प होगी। इंदौर से लेकर भोपाल तक के धुरंधरों का मानना है कि इंदौर की फाइनल पिक्चर अभी बाकी है।