भागीरथपुरा की घटना के बाद ‘सिर उठाकर’ सड़कों पर निकली कांग्रेस, सालों बाद जुटी इतनी भीड़, पहली बार ‘उमंग’ में दिखे कार्यकर्ता.
इंदौर। सफाई में देश में लगातार आठ बार नंबर वन आने वाले इंदौर के भीगारथपुरा में गंदे पानी से मौत के मामले में भाजपा बैकपुट पर है। इनके नेता इस संकट से उबरने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन कांग्रेस ‘उमंग’ में है। भाजपा को भी कांग्रेस के इस उग्र रूप की उम्मीद नहीं थी, लेकिन कांग्रेस ने इस मामले में यह दिखा दिया कि वह जिंदा है और जनता के साथ है।
रविवार को बड़ा गणपति से राजवाड़ा तक कांग्रेस ने न्याय मार्च निकाला। जिसने भी इस यात्रा को प्रत्यक्ष देखा वह दंग रह गया। जिसने भी फोटो और वीडियो देखे, उसकी आंखों को पल भर भरोसा नहीं हुआ। कांग्रेस के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं के साथ ही अनुमान से ज्यादा संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर दिखाई दिए। इस पूरे मामले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से दोस्ती के कारण कन्नी काट रहे पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को भी आना पड़ा। कांग्रेस की यह तस्वीर आने वाले भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय कर सकती है। न्याय यात्रा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी हरीश चौधरी, अजय सिंह सहित प्रदेश के कांग्रेस विधायक-पार्षद, कांग्रेस सेवादल, महिला कांग्रेस के पदाधिकारी भी शामिल हुए है।
भाजपा ने इस मामले को हल्के में लिया
जब यह घटनाक्रम हुआ और पूरे देश में इसकी निंदा हो रही थी, भाजपा के मंत्री, महापौर, सांसद, विधायक, पार्षद बगलें झांक रहे थे। कोई घंटा बजा रहा था तो कोई भागीरथपुरा के पानी के साफ होने की गारंटी दे रहा था। कई लोग इसे मंत्रीजी के खिलाफ साजिश भी बता रहे थे। शुरुआती कई दिनों तक भाजपा के जिम्मेदारों के बयान ऐसे आ रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। इससे साफ जाहिर है कि भाजपा इसे हल्के में ले रही थी। जब मौतों का आंकड़ा बढ़ता गया, पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट आने लगी तो और पोल खुलने लगी।
उमंग सिंघार ने मुद्दे को तुरंत लपका
जब से कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई है, जनता के किसी मुद्दे पर सरकार के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन नहीं कर पाई है। बाद में तो यह भी कहा जाने लगा कि कांग्रेस का जो भी अध्यक्ष आता है, वह सत्ता पक्ष का मोहरा बनकर रह जाता है। यही आरोप नेता प्रतिपक्ष पर भी लगते रहे हैं, लेकिन इस बार यह सारी बातें गलत साबित होती दिखीं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इस मुद्दे को समझ चुके थे। वे इंदौर आए। भागीरथपुरा भी गए। बस्तियों में जाकर पानी की जांच भी की। लोगों से मिले। उनके बयान और वीडियो वायरल हुए, तब भाजपा को लगा की मामला गंभीर है। उमंग सिंघार अपना काम कर गए थे। कांग्रेस के अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं को भी लगा कि यही वक्त है, लोहा गर्म है…।
जय के विरोध में वीरू को भी आना पड़ा
कांग्रेस और भाजपा में दिग्विजय सिंह और कैलाश विजयवर्गीय की जोड़ी को जय और वीरू के रूप में भी जाना जाता है। दोनों के संबंध किसी से छुपे नहीं हैं। हाल ही में विधानसभा में दिग्विजय सिंह की प्रशंसा कर विजयवर्गीय ने इस पर मुहर भी लगा दी थी। चूंकि मामला विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र का है, इसलिए दिग्विज सिंह अब तक इस मुद्दे पर कन्नी काट रहे थे। लेकिन, जब दिग्विजय को लगा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और वे अलग-थलग पड़ रहे हैं तो उन्होंने बचते-बचाते सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किए। आज की न्याय यात्रा में उनका खुद मौजूद होना यह बताता है कि कांग्रेस के लिए मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस ने दिखा दिया कि वह अभी भी जिन्दा है
आज की यात्रा से कांग्रेस ने यह दिखा दिया है कि वह जिन्दा है और ऐसे मुद्दों पर वह जनता के साथ खड़ी है। खास बात यह रही कि इंदौर के सभी वार्डों के कार्यकर्ता रैली के रूप में इस यात्रा में शामिल होने आए। यह मुद्दा चूंकि हर व्यक्ति से जुड़ा है, इसलिए ऐसा काफी सालों बाद हुआ कि इंदौर के हर वार्ड के कांग्रेस कार्यकर्ता जागृत हो गए। इतना ही नहीं ग्रामीण क्षेत्र से भी काफी संख्या में कार्यकर्ता इसमें शामिल होने आए।
भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए सबक
कांग्रेस का आज का प्रदर्शन भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए सबक है। भाजपा के लिए सबक यह कि अगर इतने गंभीर मुद्दे को भी वे हल्के में लेते रहेंगे तो वह आगे जाकर बहुत भारी पड़ने वाला है। जिस जनता के वोट से जीतकर भाजपा सत्ता में है, उसका ख्याल तो उसे रखना ही पड़ेगा। कांग्रेस के लिए सबक यह है कि अगर वह इस तरह के जनहित के मुद्दे जोर-शोर से उठाए तो जनता उसके साथ है।