ईडी की कार्रवाई में बाधा डालने पर ममता बनर्जी को भाजपा ने घेरा, रविशंकर प्रसाद बोले- बंगाल में ऐसा क्या है, जिसे वे छिपा रही हैं.
नई दिल्ली। कोलकाता में गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापे के बाद से सियासत गरम है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी न केवल ईडी की कार्रवाई के दौरान पहुंची, बल्कि कुछ फाइलें भी ले आईं। भाजपा अब ममता बनर्जी पर हमलावर है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में ममता जी कोई जांच नहीं होने देती हैं। बंगाल में ऐसा क्या है, जिसे ममता जी छिपा रही हैं।
भाजपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कल बंगाल में जो हुआ, वह आजाद भारत में पहले कभी नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पूरा काम न सिर्फ अनैतिक, गैर-जिम्मेदार और असंवैधानिक है, बल्कि उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार कर दिया है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि रेड निजी कंपनी के दफ्तर पर थी। हमें नहीं समझ आता कि इसमें ममता क्यों घबरा गई हैं। उन्हें डर है कि उनके घोटालों के राज खुल जाएंगे। जांच को रोकना कानून का उल्लंघन है।
ये रेड एक प्राइवेट कंसल्टेंसी फर्म पर थी
बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आपको मालूम है कि बंगाल कोयले की स्मगलिंग का एक बहुत बड़ा हॉट स्पॉट है, जिसमें सत्ताधारी दल के लोग भी शामिल हैं। मैं आपको बता दूं कि ये रेड न तो ममता बनर्जी के घर पर थी, न उनके दफ्तर में, न ही टीएमसी के दफ्तर में और न ही टीएमसी के किसी नेता या मंत्री के घर पर थी। ये रेड एक प्राइवेट कंसल्टेंसी फर्म पर थी, जिसके यहां करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत आई थी। ऐसे में ममता बनर्जी जाती हैं, उनके पुलिस अधिकारी जाते हैं, ईडी के लोगों को धमकाते हैं, ममता बनर्जी उनसे बहस करती हैं और पेपर छीन कर चली जाती हैं। उनका आचरण न केवल अमर्यादित, असंवैधानिक और शर्मनाक है, बल्कि उन्होंने इससे संवैधानिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है।
क्या है इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी
ई़डी ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) पर छापा मारा था। यह एक पॉलिटिकल कंसलटेंट फर्म है। इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन हैं। यह राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा-आधारित कैंपेन, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच में मदद करती है। I-PAC पहले सिटीजंस फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) थी। इसकी शुरुआत 2013 में प्रशांत किशोर ने प्रतीक के साथ की थी। बाद में इसका नाम I-PAC रखा गया। प्रशांत किशोर के हटने के बाद I-PAC की कमान प्रतीक के पास आ गई।