तेजी से बदल रहा है युद्ध का स्वरूप, अब धुंधली हो रही हैं युद्ध और शांति की सीमाएं: नौसेना प्रमुख.
तेजी से बदल रहा है युद्ध का स्वरूप, अब धुंधली हो रही हैं युद्ध और शांति की सीमाएं: नौसेना प्रमुख
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि आधुनिक तकनीकी प्रगति और बढ़ते गैर-परंपरागत खतरों के चलते युद्ध का स्वरूप बेहद तेजी से बदल रहा है। उन्होंने आगाह किया कि अब युद्ध और शांति के बीच की रेखाएं धुंधली होती जा रही हैं।

तकनीक और गैर-राज्यीय तत्वों की भूमिका पर चिंता
सीआईआई के एक कार्यक्रम में बोलते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि व्यावसायिक तकनीकों की पहुंच आतंकियों और नॉन-स्टेट ऐक्टर्स तक हो जाने से खतरों की प्रकृति और भी जटिल हो गई है।
उन्होंने कहा हम एक सटीकता के युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहां उच्च-सटीक क्षमताएं और उनकी बड़ी मात्रा हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।"
एडमिरल ने यह भी चेताया कि आतंकवाद जैसे खतरे व्यापक संघर्ष में तब्दील हो सकते हैं।
अंतरिक्ष, साइबर और गैर-संपर्क युद्ध बना नई चुनौती
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में अंतरिक्ष और साइबर डोमेन के साथ-साथ गैर-संपर्क युद्ध (non-contact warfare) भी एक नई वास्तविकता बन चुकी है, जिसमें बिना औपचारिक युद्ध की घोषणा के भी संघर्ष शुरू हो सकते हैं।
समुद्री रणनीति में भारत की भूमिका पर भी बोले
भारत की समुद्री रणनीतिक नीति पर बोलते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का "सागर" (Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण अब एक व्यापक रणनीतिक सिद्धांत बन चुका है, जो भारत की बढ़ती समुद्री पहुंच को दर्शाता है।

वायुसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर को बताया राष्ट्रीय विजय
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को एक "राष्ट्रीय विजय" बताते हुए कहा कि इसे भारतीय बलों ने मिलकर बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दिया।
उन्होंने कहा हम सत्य के मार्ग पर चल रहे थे और मुझे लगता है कि ईश्वर भी हमारे साथ था।"
एयर चीफ ने कहा कि इस ऑपरेशन में हर भारतीय की भावना जुड़ी थी और पूरा देश इस जीत को गर्व और उम्मीद के साथ देख रहा था।
इन दोनों सैन्य प्रमुखों के बयान आधुनिक युद्ध की बदलती परिभाषा, भारत की बढ़ती वैश्विक सैन्य भूमिका और तकनीकी खतरों की गंभीरता को रेखांकित करते हैं।