दोहरे मौसम तंत्र की बड़ी चेतावनी: मलक्का जलडमरूमध्य से उठ रहा ‘सेंयार’ चक्रवात, दक्षिण भारत में बढ़ेगी बारिश और खतरा
सामुद्रिक क्षेत्रों में सक्रिय दो अलग-अलग मौसम प्रणालियाँ आने वाले दिनों में दक्षिण भारत के मौसम को गहराई से प्रभावित कर सकती हैं। मलक्का जलडमरूमध्य और उसके आसपास बना गहरा दबाव तेजी से मजबूत हो रहा है और इसके चक्रवात में बदलने की आशंका जताई गई है।

चक्रवात ‘सेंयार’ बनने की तैयारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यदि यह प्रणाली चक्रवात का रूप लेती है, तो इसका नाम ‘सेंयार’ होगा—जिसका अर्थ है ‘शेर’। यह नाम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सुझाया है।
नवंबर का महीना सामान्यतः बंगाल की खाड़ी में चक्रवात गतिविधियों का चरम माना जाता है, और इस वर्ष भी परिस्थितियाँ उसी दिशा में संकेत दे रही हैं।
दो मौसम तंत्र सक्रिय – खतरे की दोहरी मार
इस समय दो प्रमुख प्रणाली सक्रिय हैं—
- मलक्का जलडमरूमध्य का गहरा दबाव, जो तेजी से चक्रवाती तूफान बन सकता है
- दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और दक्षिण श्रीलंका के पास कम दबाव क्षेत्र, जो डिप्रेशन में बदलने की संभावना लिए हुए है
इनके कारण 60–100 किमी/घंटा की तेज हवाएं समुद्र में उथल-पुथल ला सकती हैं और तटीय गतिविधियों पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
अंडमान–निकोबार में भारी बारिश अलर्ट
IMD ने 27 नवंबर को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में
- भारी से बहुत भारी बारिश
- तेज हवाएं
- गरज-चमक
- समुद्र में तुफानी स्थितियाँ
की चेतावनी जारी की है।
मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। 28 नवंबर से बारिश में धीरे-धीरे कमी के आसार हैं।
दक्षिण भारत पर असर: तमिलनाडु, आंध्र व केरल में तेज बारिश
दूसरा कम दबाव क्षेत्र दक्षिण भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके प्रभाव से—
- तमिलनाडु
- आंध्र प्रदेश
- केरल
में बारिश का दौर जारी है और इसकी तीव्रता आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।
तमिलनाडु के कई तटीय जिलों—विशेषकर तूतीकोरिन—में भारी बारिश के चलते
- जलभराव
- सड़कें डूबने
- जनजीवन प्रभावित के हालात बन गए हैं।
दोहरे मौसम तंत्र की बड़ी चेतावनी: मलक्का जलडमरूमध्य से उठ रहा ‘सेंयार’ चक्रवात, दक्षिण भारत में बढ़ेगी बारिश और खतरा
सामुद्रिक क्षेत्रों में सक्रिय दो अलग-अलग मौसम प्रणालियाँ आने वाले दिनों में दक्षिण भारत के मौसम को गहराई से प्रभावित कर सकती हैं। मलक्का जलडमरूमध्य और उसके आसपास बना गहरा दबाव तेजी से मजबूत हो रहा है और इसके चक्रवात में बदलने की आशंका जताई गई है।
चक्रवात ‘सेंयार’ बनने की तैयारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यदि यह प्रणाली चक्रवात का रूप लेती है, तो इसका नाम ‘सेंयार’ होगा—जिसका अर्थ है ‘शेर’। यह नाम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सुझाया है।
नवंबर का महीना सामान्यतः बंगाल की खाड़ी में चक्रवात गतिविधियों का चरम माना जाता है, और इस वर्ष भी परिस्थितियाँ उसी दिशा में संकेत दे रही हैं।
दो मौसम तंत्र सक्रिय – खतरे की दोहरी मार
इस समय दो प्रमुख प्रणाली सक्रिय हैं—
मलक्का जलडमरूमध्य का गहरा दबाव, जो तेजी से चक्रवाती तूफान बन सकता है
दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और दक्षिण श्रीलंका के पास कम दबाव क्षेत्र, जो डिप्रेशन में बदलने की संभावना लिए हुए है
इनके कारण 60–100 किमी/घंटा की तेज हवाएं समुद्र में उथल-पुथल ला सकती हैं और तटीय गतिविधियों पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
अंडमान–निकोबार में भारी बारिश अलर्ट
IMD ने 27 नवंबर को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में
भारी से बहुत भारी बारिश
तेज हवाएं
गरज-चमक
समुद्र में तुफानी स्थितियाँ
की चेतावनी जारी की है।
मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। 28 नवंबर से बारिश में धीरे-धीरे कमी के आसार हैं।
दक्षिण भारत पर असर: तमिलनाडु, आंध्र व केरल में तेज बारिश
दूसरा कम दबाव क्षेत्र दक्षिण भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके प्रभाव से—
तमिलनाडु
आंध्र प्रदेश
केरल
में बारिश का दौर जारी है और इसकी तीव्रता आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।
तमिलनाडु के कई तटीय जिलों—विशेषकर तूतीकोरिन—में भारी बारिश के चलते
जलभराव
सड़कें डूबने
जनजीवन प्रभावित के हालात बन गए हैं।