प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर अपनी उम्र छुपाने का आरोप, भाजपा नेता के खुलासे के बाद बढ़ सकती है उलझन.
इंदौर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर अपनी उम्र छुपाने का आरोप लगा है। पटवारी पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने विधानसभा में अपनी उम्र की कोई और ही तारीख बताई है, जबकि मार्कशीट में कुछ और है। कहा तो यह जा रहा है कि युवा कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनने के चक्कर में पटवारी ने ऐसा किया। अब जबकि मामला उजागर हो गया है, पटवारी की उलझनें बढ़ सकती हैं।
भाजपा नेता श्याम साहू ने इस मामले की शिकायत राज्य पुलिस, विधानसभा अध्यक्ष के साथ ही निर्वाचन आयोग से भी की है। भाजपा नेता श्याम साहू ने पटवारी के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से लेकर कक्षा दसवीं की मार्कशीट आदि सार्वजनिक करते हुए उम्र छुपाने का आरोप लगाया है। जीतू पटवारी पिता रमेश चौहान पटवारी की हाई स्कूल की मार्कशीट में जन्मतिथि 25 जनवरी 1973 दर्ज है, जबकि विधानसभा के रिकॉर्ड में 19 नवंबर 1974 बताई गई है। इस मामले में कहा यह भी जा रहा है कि 2008 में जीतू पटवारी जब मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे उस समय कक्षा दसवीं की अंकसूची के हिसाब से उनकी उम्र 35 वर्ष से कुछ महीने ज्यादा हो रही थी, उस समय युवा कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए अधिकतम उम्र 35 वर्ष ही थी। संभावना व्यक्त की जा रही है कि शायद इसी वजह से उन्होंने उम्र में हेरफेर की होगी। उस समय जो उम्र पटवारी द्वारा बताई गई उसी को बाद में विधानसभा निर्वाचन और अन्य दस्तावेजों में भी दर्शाया गया। इन दोनों जन्मतिथियों में करीब 22 महीने का अंतर है। जीतू पटवारी की उम्र से संबंधित जो दस्तावेज सामने आए हैं, उनमें से कई में जन्मतिथि की जगह सीधे उम्र लिखी हुई है।
इंदिरा गांधी के जन्मदिन पर रखी तारीख
भाजपा नेता श्याम साहू ने कहा कि उन्होंने जीतू पटवारी की मार्कशीट उनके स्कूल से निकलवाई है, जिसमें उनका जन्म 25 जनवरी 1973 लिखा हुआ है पर वे सभी को अपनी जन्म तारीख 19 नवंबर 1974 बताते हैं। 19 नवंबर इंदिरा गांधी की जन्म तारीख है, तो क्या जीतू पटवारी की इस जन्म तारीख को चुनने में कांग्रेस के सभी नेता शामिल थे। साहू ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए, ये अपराध है।
बाद में बनवाया फर्जी जन्म प्रमाण पत्र
जीतू पटवारी की जो डुप्लीकेट मार्कशीट शासकीय माध्यमिक विद्यालय मॉडल विलेज लालबाग इंदौर से सत्यापित कर जारी की गई, वह 2008 की है। संभवत इसके बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया हो जिसमें जन्मतिथि 19 नवंबर 1974 दर्शाया गया हो। हाई स्कूल के प्रमाणपत्र के विकल्प के तौर पर पासपोर्ट, पैन कार्ड और आधार कार्ड में जन्मतिथि दर्ज करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया जाता है। जब दस्तावेजों में जरूरत पड़ी तो बाद में पटवारी ने नगर निगम से फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवा लिया।
करीब 20 लाख में भाजपा ने किया सौदा
सूत्र बताते हैं कि यह दस्तावेज किसी के पास लंबे समय से पड़े हुए थे। वह व्यक्ति जब भी मुंह खोलता था, पटवारी उसका मुंह बंद कर देते थे। कहा जा रहा है कि उस व्यक्ति ने पटवारी से जुड़े दस्तावेजों का सौदा करीब 20 लाख रुपए में किया है। भागीरथपुरा मामले में उलझी भाजपा ने आज शनिवार को राहुल गांधी के दौरे को देखते हुए, यह मुद्दा उठाया। कहा तो यह भी जा रहा है कि लंबे समय से दस्तावेजों के लिए सौदेबाजी चल रही थी।
पटवारी को भुगतना पड़ सकता है खामियाजा
जन्म तारीख छुपाना अपराध की श्रेणी में ही आता है। विशेषकर राजनीतिक मामलों में तो कई नेताओं को सजा भी भुगतनी पड़ी है। ऐसे में इन शिकायतों के आधार पर पटवारी के दस्तावेजों की जांच की जाए तो मामला उलझ सकता है। छह साल के उनके चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। पासपोर्ट से लेकर आधार कार्ड, पैन कार्ड में उम्र छुपाने के मामले में उन पर धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज हो सकता है।
पिता का सरनेम भी छुपा गए पटवारी
स्कूल के प्रमाण पत्र में पिता का नाम रमेश चौहान पटवारी लिखा है, जबकि जीतू पटवारी ने कहीं भी चौहान सरनेम का इस्तेमाल नहीं किया है। वे हमेशा जितेंद्र कुमार पटवारी ही लिखते रहे हैं। इस मामले में भी वे उलझ सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि जीतू पटवारी ने अपने एक वकील मित्र के कहने में यह सब किया।