अब ‘ऑपरेशन भोपाल’ में जुटा डीसी बोर्ड, किसी भी तरह रजिस्ट्रार से अपने पक्ष में ऑर्डर लेने की कोशिश, ताकि बदल सकें डेली कॉलेज का संविधान.
इंदौर। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज का संचालन करने वाला डीसी बोर्ड अब ऑपरेशन भोपाल में जुटा हुआ है। किसी भी तरह सहायक रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी के फैसले के खिलाफ रजिस्ट्रार से अपने पक्ष में फैसला करवाने की कोशिश हो रही है। ताकि, एजीएम बुलाए बिना ही 9 सदस्यों का बोर्ड डेली कॉलेज का संविधान बदलने में सफल हो जाए।
उल्लेखनीय है कि डेली कॉलेज के पैरेंट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात कर वहां चल रही गतिविधियों की पूरी जानकारी दी थी। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से कहा था कि 12 नवंबर को एक बैठक बुलाई है। इसमें बोर्ड के सिर्फ 9 सदस्य ही उपस्थित रहेंगे। डीसी बोर्ड संविधान में संशोधन करना चाहता है ताकि वह हमेशा सत्ता में बना रहे। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर सहायक रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी बीडी कुबेर ने एक आदेश निकाला कि 12 नवंबर को होने वाली बैठक में संविधान संशोधन संबंधित कोई कार्रवाई नहीं की जाए। कलेक्टर के आदेश के बाद 12 नवंबर को डीसी बोर्ड की बैठक तो हुई, लेकिन संविधान नहीं बदला जा सका।
किसी भी हालत में नहीं बुलाना चाहते एजीएम
पैरेंट्स ने कलेक्टर को सौंपे अपने ज्ञापन में कहा था कि डीसी बोर्ड ने एक जुलाई 25 को अपनी मीटिंग में बिना एजीएम बुलाए गलत तरीके से संविधान बदलने का प्रयास किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा था कि पारदर्शिता एवं जवाबदेही के मकसद से सब रजिस्ट्रार इंदौर के समक्ष हमने याचिका दायर की थी। इसमें 29 अगस्त 25 को एक आदेश पारित किया गया कि डेली कॉलेज में वार्षिक आमसभा बुलाई जाए, जिसमें सभी सदस्यों को आमंत्रित किया जाए। इस आदेश के विरुद्ध डेली कॉलेज ने रजिस्ट्रार भोपाल में अपील दायर की एवं 19 सितंबर 25 को डेली कॉलेज को स्टे मिल गया। अब कोशिश है कि रजिस्ट्रार कोई ऐसा ऑर्डर निकाल दें, जिससे एजीएम बुलाने की नौबत नहीं आए।
पहले 20 लाख फिर 40 लाख की रिश्वत की पेशकश
सूत्र बताते हैं कि जब सहायक रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी के एजीएम बुलाने के आदेश के बाद डीसी बोर्ड के कुछ सदस्यों ने 20 लाख रुपए की पेशकश की थी। इसके बाद जब दोबारा कलेक्टर के निर्देश पर आदेश निकला तो यह रकम बढ़ कर 40 लाख रुपए हो गई। अब पैरेंट्स का सवाल है कि आखिर संविधान बदलने की इतनी भी क्या जरूरत है कि इतनी रिश्वत की पेशकश की जा रही है।
ऑपरेशन भोपाल में भी धन लुटाने को तैयार
सूत्र बताते हैं कि डीसी बोर्ड ऑपरेशन भोपाल में भी धन लुटाने को तैयार है। पैरेंट्स तो यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब इंदौर स्तर पर रिश्वत की रकम 40 लाख तक जा सकती है तो भोपाल में आखिर कितनी रकम पर सौदेबाजी होगी। डीसी बोर्ड ने पहले इसके लिए संघ के पदाधिकारियों के माध्यम से कोशिश की। प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का भी डर दिखाया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो अब ऑर्डर खरीदने की तैयारी है।
पूरा मामला एक गुट के कब्जे को लेकर है
दरअसल पूरा मामला वर्तमान में डीसी बोर्ड में काबिज एक गुट के कब्जे को लेकर है। यह गुट डीसी बोर्ड को छोड़ना ही नहीं चाहता। इसके लिए संविधान संशोधन कर ओल्ड डेलियन एसोसिएशन वाली कैटेगरी खत्म करना चाहते हैं। सिर्फ पुराने दानदाता और नए दानदाता वाली कैटेगरी में ही चुनाव कराना चाहते हैं। ओल्ड डेलियन एसोसिएशन वाली कैटेगरी खत्म कर सरकार द्वारा मनोनीत कराने की कोशिश हो रही है, ताकि वर्तमान बोर्ड का ही कब्जा बना रहे।
बदनामी होने लगी तो चलाने लगे अभियान
जब संविधान बदलने के मामले का जबरदस्त विरोध हुआ और बदनामी होने लगी तो अब डीसी बोर्ड अपने पक्ष में तरह-तरह के अभियान भी चलाने लगा। पैरेंट्स, स्टूडेंट्स और स्टाफ ले अपने पक्ष में हस्ताक्षर भी करवा रहे हैं। इतना भी लिखवाया जा रहा है कि यह बोर्ड अच्छा काम कर रहा है आगे भी यही रहना चाहिए। यहां सवाल यह है कि स्टाफ या स्टूडेंट्स से अपने पक्ष में लिखवाने का क्या फायदा, क्योंकि वोट तो मेंबर ही देंगे ना।