गांधी नगर संस्था में भारी घोटाला करने वाले सहकारिता विभाग के उप अंकेक्षक आशीष सेठिया की विभागीय जांच शुरू, सहकारिता आयुक्त ने दिए आदेश.
इंदौर। सहकारिता विभाग का जादूगर कहे जाने वाले आशीष सेठिया की गर्दन इस बार फंसती नजर आ रही है। गांधी नगर सहित कई सहकारी संस्थाओं में भूमाफियाओं के साथ मिलकर गड़बड़ी करने वाले सेठिया के खिलाफ कई बार कार्रवाई की सिफारिश हो चुकी है। अब सहकारिता आयुक्त मनोज पुष्प ने सेठिया के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
सहकारिता विभाग के आयुक्त मनोज पुष्प ने अपने आदेश में कहा है कि आशीष सेठिया, उप अंकेक्षक की जिला इंदौर में पदस्थी के दौरान गांधी नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था के संबंध में उप आयुक्त सहकारिता जिला इंदौर द्वारा की गई जांच में दोषी पाया गया था। इसके बाद सेठिया को 06 अक्टूबर 2025 कारण बताओ नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया। सेठिया ने अपना उत्तर 29 अक्टूबर 2025 को प्रस्तुत किया। प्रस्तुत उत्तर का परीक्षण किया गया तो वह मान्य योग्य नहीं पाए गए। अब सेठिया के विरूद्ध विभागीय जांच संस्थित करने का निर्णय लिया गया। सहकारिता आयुक्त ने प्रकरण में उप आयुक्त सहकारिता जिला इंदौर को जांचकर्ता अधिकारी एवं वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक (सामान्य) कार्यालय उप आयुक्त सहकारिता जिला इंदौर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया है।
परिहार की जांच में हुए थे खुलासे
सहकारिता विभाग के तत्कालीन अंकेक्षण अधिकारी जीएस परिहार ने गांधी नगर संस्था के मामले में धारा 59 का प्रतिवेदन 08 दिसंबर 2020 को उपायुक्त, सहकारिता को प्रस्तुत किया था। इसमें कई गंभीर अनियमितताएं मिली थीं। इसमें यह भी कहा गया था कि संस्था का वर्तमान संचालक एवं प्रबंधक म.प्र. सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 एवं संस्था की पंजीकृत उपविधियों के निर्देशों का पालन करने के लिए रजामंद नहीं है। पूर्व और वर्तमान संचालक मंडल ने अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया है। इसके कारण संस्था में अनियमितताएं हैं, जिनका उचित निराकरण नहीं किया जा रहा है।
गजभिये और सेठिया ने कार्रवाई को टाला
परिहार के प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि तत्कालीन उपायुक्त सहकारिता एमएल गजभिये, उप अंकेक्षक आशीष सेठिया, तत्कालीन प्रशासक व सहकारी निरीक्षक प्रवीण जैन (वर्तमान में सेवानिवृत्त), संस्था प्रबंधक फूलचंद पाण्डेय ने जानबूझकर कार्रवाई को टाला। इसलिए ये सभी दोषी हैं। उपायुक्त को कार्रवाई के लिए पत्र क्र. गृह/2024/1340 दिनांक 07.08.2024, पत्र क्र. गृह/2024/1642 दिनांक 14.10.2024, पत्र क्र. गृह/2024/1688 दिनांक 21.10.2024, पत्र क्र. गृह/2025/453 दिनांक 03.04.2025 एवं पत्र क्रमांक गृह/2025/667 दिनांक 20.05.2025 भेजा गया, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।
जांच करने गए और कर लिया प्लॉटों का सौदा
शिकायतकर्ता सत्यनारायण अग्रवाल ने बताया कि आशीष सेठिया जब जांच करने पहुंचे तो उन्होंने गांधी नगर संस्था के प्रबंधक फूलचंद पांडेय से सौदेबाजी कर ली। तीन प्लॉट देने की बात पर सौदा पक्का हुआ। सेठिया ने कहा कि तीन प्लॉटों के बदले सही जांच रिपोर्ट दे दूंगा। सेठिया ने अपने भाइयों के नाम से प्लॉट भी ले लिए प्रतिवेदन के अनुसार संस्था के अभिलेख थाने में वर्ष 2013 से जमा हो गए थे। इसके बाद भी आशीष सेठिया, उप अंकेक्षक के दोनों भाइयों को भूखंड की रसीदें जारी की गईं।
संयुक्त आयुक्त मकवाना ने भी भेजी थी रिपोर्ट
संयुक्त आयुक्त मकवाना ने अपने प्रतिवेदन में लोकायुक्त में शिकायत के आधार पर तीन बिंदुओं पर इन तीनों पर कार्रवाई के लिए कहा था। पहला बिंदु है तत्कालीन अंकेक्षण अधिकारी जीएस परिहार द्वारा म.प्र.सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1960 की धारा 59 के तहत प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन पर कार्रवाई की मांग, जिसमें भारी गड़बड़ी पाई गई है। दूसरा बिंदु है जांच प्रतिवेदन में कार्यवाही में देरी की जांच कर इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई। तीसरा बिंदु है संस्था के अभिलेख थाने में वर्ष 2013 से जमा होने के बाद भी आशीष सेठिया, उप अंकेक्षक के दोनों भाइयों के नाम रसीदें जारी की गई हैं।