भाषा और खान-पान पर विवाद: आदित्य ठाकरे का बीजेपी पर निशाना.
भाषा और खान-पान पर विवाद: आदित्य ठाकरे का बीजेपी पर निशाना
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने भाषा और खान-पान को लेकर होने वाले विवादों पर बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।

भाजपा पर राजनीति करने का आरोप
आदित्य ठाकरे ने कहा, "भाषा की पॉलिटिक्स हो, वेज-नॉनवेज की पॉलिटिक्स हो, हिंदू-मुस्लिम की पॉलिटिक्स हो या हिंदुओं में जाति की पॉलिटिक्स—ये सारे मुद्दे केवल उन्हीं राज्यों में क्यों उठते हैं, जहां बीजेपी की सरकार है?"
उन्होंने दावा किया कि "हमारी सरकार ढाई साल चली, तब ऐसा कोई विवाद नहीं हुआ। अन्य राज्यों में, जहां बीजेपी सत्ता में नहीं है, वहां स्थिति बेहतर है। फिर जहां बीजेपी सत्ता में है, वहां हिंदुत्व ख़तरे में क्यों आ जाता है?"
सुख-समृद्धि पर खतरे का सवाल
ठाकरे ने आगे कहा, "जहां-जहां भाजपा राज करती है, वहां की सुख-समृद्धि ख़तरे में क्यों आ जाती है? इसका कारण यह है कि बीजेपी चाहती है कि लोग आपस में लड़ते-झगड़ते रहें, ताकि असली मुद्दों से ध्यान हट जाए।"
भाषा के सम्मान की बात
उन्होंने सभी को विभिन्न भाषाएं सीखने की सलाह देते हुए कहा, "हर राज्य की अपनी भाषा का मान-सम्मान होना चाहिए। अगर कोई उस भाषा का अपमान करता है या कहता है कि वह उसे नहीं बोलेगा, तो यह गलत है। महाराष्ट्र में कानून का डर नहीं है, इसलिए लोग कानून अपने हाथ में लेने लगते हैं।"
भाषा और खान-पान पर विवाद: आदित्य ठाकरे का बीजेपी पर निशाना
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने भाषा और खान-पान को लेकर होने वाले विवादों पर बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
भाजपा पर राजनीति करने का आरोप
आदित्य ठाकरे ने कहा, "भाषा की पॉलिटिक्स हो, वेज-नॉनवेज की पॉलिटिक्स हो, हिंदू-मुस्लिम की पॉलिटिक्स हो या हिंदुओं में जाति की पॉलिटिक्स—ये सारे मुद्दे केवल उन्हीं राज्यों में क्यों उठते हैं, जहां बीजेपी की सरकार है?"
उन्होंने दावा किया कि "हमारी सरकार ढाई साल चली, तब ऐसा कोई विवाद नहीं हुआ। अन्य राज्यों में, जहां बीजेपी सत्ता में नहीं है, वहां स्थिति बेहतर है। फिर जहां बीजेपी सत्ता में है, वहां हिंदुत्व ख़तरे में क्यों आ जाता है?"
सुख-समृद्धि पर खतरे का सवाल
ठाकरे ने आगे कहा, "जहां-जहां भाजपा राज करती है, वहां की सुख-समृद्धि ख़तरे में क्यों आ जाती है? इसका कारण यह है कि बीजेपी चाहती है कि लोग आपस में लड़ते-झगड़ते रहें, ताकि असली मुद्दों से ध्यान हट जाए।"
भाषा के सम्मान की बात
उन्होंने सभी को विभिन्न भाषाएं सीखने की सलाह देते हुए कहा, "हर राज्य की अपनी भाषा का मान-सम्मान होना चाहिए। अगर कोई उस भाषा का अपमान करता है या कहता है कि वह उसे नहीं बोलेगा, तो यह गलत है। महाराष्ट्र में कानून का डर नहीं है, इसलिए लोग कानून अपने हाथ में लेने लगते हैं।"