दुनिया को हमने एक बार फिर दिखा दिया हम हैं ‘टीम इंडिया’.
ऐसे समय जब दुनिया में उथल-पुथल चल रही है सबसे जरूरी है एकजुटता। चाहे वह युद्ध का मैदान हो या फिर खेल का। कल अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में जो कुछ हुआ, उससे फिर भारत ने अपनी एकजुटता की ताकत को दिखा दिया है।
जब भारत फाइनल में पहुंची तो न्यूजीलैंड की मजबूत टीम को कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। स्टेडियम को लेकर भी बातें कही जा रही थीं, लेकिन जब मैच शुरू हुआ तो सब पर विराम लग गया। जरा याद कीजिए जब ओपनिंग करने उतरे अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन ने चौकों-छक्कों की बारिश शुरू की तो पता ही नहीं चल रहा था कि सामने मैदान में न्यूजीलैंड है। यह वही अभिषेक शर्मा थे, जो अब तक इस टूर्नामेंट के किसी भी मैच में सफल नजर नहीं आ रहे थे।
आप किसी भी खिलाड़ी को ले लीजिए, सब पूरी ताकत से मैदान में जुटे रहे। कल भले ही कप्तान सूर्यकुमार यादव जीरो पर आउट हो गए, लेकिन हेड कोच गौतम गंभीर के साथ उनकी रणनीति के कारण ही भारत इस खिताब पर कब्जा कर पाने में सफल रहा। जब भी कोई विकट परिस्थिति आई, गंभीर ने सूर्या को हिम्म्त दिया । संजू सैमसन को लेकर तरह-तरह की बातें कही जा रहीं थीं, लेकिन कोच गंभीर इस पर गंभीर रहे, जिसका परिणाम इस पूरे टूर्नामेंट में दिखा।
अभिषेक शर्मा को लेकर भी यह कहा जा रहा था कि इन्हें ओपनिंग के लिए बेकार उतारा जा रहा है, लेकिन गंभीर को पूरा भरोसा था। आखिरकार अभिषेक ने फाइनल में 21 गेंद पर 52 रन की ऐसी पारी खेली, जिसने मैच की दिशा तय कर दी। ईशान किशन को टीम में रखना भी फायदेमंद रहा। ईशान ने फाइनल में 25 गेंद पर 54 रन की पारी खेलकर टीम के लिए जीत की नींव रखी।
कल की जीत के लिए टीम इंडिया का पूरा प्रबंधन बधाई का पात्र है, जिसने सुनील गावस्कर सहित अधिकांश दिग्गजों के कहने के बाद भी टीम में बदलाव नहीं किया। न किसी के कहने पर अभिषेक शर्मा को बाहर किया और न ही वरुण चक्रवर्ती को बिठाया। इस मैच ने गौतम गंभीर को भी राहत दी है, जिनके फैसलों की हमेशा आलोचना होती रही है।
यही वजह है कि अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में पूरे समय टीम इंडिया हावी रही।
जी हां…एकजुट…टीम इंडिया और यही है हमारे भारत की ताकत…