हम अशांति पैदा नहीं करना चाहते,सरकार टालमटोल की नीति अपना रही .
हम अशांति पैदा नहीं करना चाहते,सरकार टालमटोल की नीति अपना रही
किसानों ने बुधवार को अपना दिल्ली चलो मार्च शुरू किया . इससे पहले मीडिया से बात करते हुए किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है कि हम अशांति पैदा नहीं करना चाहते. किसान दिन रात मेहनत करते हैं, अगर उन्हें रोकने के लिए बड़े-बड़े बैरिकेड लगाए जा रहे हैं तो ये सही नहीं है.

डल्लेवाल ने कहा, हमारी मंशा किसी भी तरह अशांति पैदा करने की नहीं है और ना ही हमारे लिए ये सम्मान की बात है कि हमें तो ऐसा करना ही है. लेकिन बात ये है कि हमने दिल्ली जाने का प्रोग्राम बनाया और ये आज नहीं बनाया. सात नवंबर को हमने आह्वान किया था कि हम दिल्ली जाएंगे, तो आज अगर सरकार कह रही है कि हमारे पास समय कम है तो मुझे लगता है कि ये सरकार की टाल-मटोल की नीति है.

सरकार को देश के किसान-मजदूर के पक्ष में फैसला लेना चाहिए. देश के किसान ने देश को आत्मनिर्भर बनाया है, रात-दिन मेहनत की है. देश में सात लाख किसान खुदकुशी कर चुके हैं. लेकिन अगर ऐसे हालात में किसान से बात करने के बजाय उन्हें रोकने के लिए इतने बड़े-बड़े बैरिकेड लगाए तो ये सही नहीं है..
हम अशांति पैदा नहीं करना चाहते,सरकार टालमटोल की नीति अपना रही
किसानों ने बुधवार को अपना दिल्ली चलो मार्च शुरू किया . इससे पहले मीडिया से बात करते हुए किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है कि हम अशांति पैदा नहीं करना चाहते. किसान दिन रात मेहनत करते हैं, अगर उन्हें रोकने के लिए बड़े-बड़े बैरिकेड लगाए जा रहे हैं तो ये सही नहीं है.
डल्लेवाल ने कहा, हमारी मंशा किसी भी तरह अशांति पैदा करने की नहीं है और ना ही हमारे लिए ये सम्मान की बात है कि हमें तो ऐसा करना ही है. लेकिन बात ये है कि हमने दिल्ली जाने का प्रोग्राम बनाया और ये आज नहीं बनाया. सात नवंबर को हमने आह्वान किया था कि हम दिल्ली जाएंगे, तो आज अगर सरकार कह रही है कि हमारे पास समय कम है तो मुझे लगता है कि ये सरकार की टाल-मटोल की नीति है.
सरकार को देश के किसान-मजदूर के पक्ष में फैसला लेना चाहिए. देश के किसान ने देश को आत्मनिर्भर बनाया है, रात-दिन मेहनत की है. देश में सात लाख किसान खुदकुशी कर चुके हैं. लेकिन अगर ऐसे हालात में किसान से बात करने के बजाय उन्हें रोकने के लिए इतने बड़े-बड़े बैरिकेड लगाए तो ये सही नहीं है..