अमेरिकी जज ने भारतीय छात्र के निर्वासन पर लगाई रोक, हमास के समर्थन के आरोप में हुआ था गिरफ्तार.
नई दिल्ली। अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में रिसर्चर भारत के बदर खान सूरी को सोमवार को अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था। उन पर हमास का प्रपोगेंडा फैलाने का आरोप है। सूरी पर निर्वासन की तलवार लटक रही थी। अमेरिका के एक जज ने उन्हें बड़ी राहत देते हुए उनके निर्वासन पर फिलहाल रोक लगा दी है।
वर्जीनिया कोर्ट के पूर्वी जिले की न्यायाधीश पेट्रीसिया टोलिवर गिल्स ने गुरुवार शाम को आदेश दिया कि बदर खान सूरी को तब तक अमेरिका से नहीं निकाला जाएगा जब तक कि अदालत इसके विपरीत आदेश जारी नहीं करती। सूरी के वकील ने उनकी रिहाई की मांग की थी। उन्होंने गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे लोगों की आवाज को दबाने या सीमित करने की कोशिश बताया था। वकील ने अदालत में दाखिल किए गए दस्तावेज में यह भी दलील दी कि न तो विदेश मंत्री मार्को रुबियो और न ही किसी अन्य सरकारी अधिकारी ने आरोप लगाया कि सूरी ने कोई अपराध किया है या वास्तव में कोई कानून तोड़ा है।
अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन ने भी सूरी के निर्वासन को रोकने के लिए आपातकालीन प्रस्ताव दायर किया था। यूनियन की वकील सोफिया ग्रेग ने कहा है कि किसी को उसके घर और परिवार से अलग करना, उसका आव्रजन दर्जा छीन लेना और उसे केवल राजनीतिक दृष्टिकोण के आधार पर हिरासत में लेना राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा असहमति को दबाने का स्पष्ट प्रयास है। यह साफ तौर पर असंवैधानिक है।
यूनिवर्सिटी ने लिय था सूरी का पक्ष
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी ने इस मामले में सूरी का पक्ष लिया था। यूनिवर्सिटी ने कहा था कि डॉ. खान सूरी एक भारतीय नागरिक हैं, जिन्हें इराक और अफगानिस्तान में शांति स्थापना पर अपने डॉक्टरेट शोध को जारी रखने के लिए अमेरिका आने के लिए नियमों के हिसाब से वीजा दिया गया था। हमें उनके किसी अवैध गतिविधि में शामिल होने की जानकारी नहीं है। हमें उनकी हिरासत का कोई कारण नहीं मिला है।