अमेरिका ने ऑकस पनडुब्बी सौदे की समीक्षा शुरू की, 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे से मेल बैठाने की तैयारी.
अमेरिका ने ऑकस पनडुब्बी सौदे की समीक्षा शुरू की, 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे से मेल बैठाने की तैयारी
अमेरिका ने ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ किए गए पनडुब्बी सौदे (AUKUS समझौता) की औपचारिक समीक्षा शुरू कर दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह समीक्षा इस बात को सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि यह त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौता वर्तमान प्रशासन के 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के अनुरूप है या नहीं।

AUKUS समझौता: चीन की बढ़ती शक्ति के जवाब में रणनीतिक कदम
इस त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी को चीन के बढ़ते प्रभाव और सैन्य शक्ति का जवाब माना जा रहा है। समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को अमेरिका से अपनी पहली परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी प्राप्त होगी, जो उसकी सामरिक क्षमता में बड़ा इजाफा करेगी।
ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया पहले ही कर चुके हैं समीक्षा
ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने इस सौदे की अपनी-अपनी समीक्षा पहले ही कर ली है। दोनों देशों ने अमेरिका द्वारा की जा रही नई समीक्षा को एक सामान्य प्रक्रिया बताया है, और कहा है कि नए अमेरिकी प्रशासन द्वारा समझौते का पुनर्मूल्यांकन स्वाभाविक है।
ऑस्ट्रेलिया पर सैन्य खर्च बढ़ाने का दबाव
इस समीक्षा की प्रक्रिया ऐसे समय पर शुरू हुई है जब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया पर सैन्य बजट बढ़ाकर जीडीपी के 2% से 3.5% करने का दबाव बना रहा है।
हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने अब तक इस मांग का विरोध किया है।
2021 में हुआ था 176 बिलियन पाउंड का सौदा
करीब 176 बिलियन पाउंड के इस महत्वपूर्ण समझौते पर वर्ष 2021 में हस्ताक्षर हुए थे, जब तीनों देशों—अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया—में अलग-अलग सरकारें थीं।
अमेरिकी रक्षा विभाग का बयान
एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने बीबीसी को बताया विभाग AUKUS की समीक्षा कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पिछले प्रशासन में किया गया यह सौदा ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे के अनुकूल हो।"
निष्कर्ष:
ऑकस समझौते की समीक्षा न केवल अमेरिका की बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि वैश्विक सुरक्षा समझौते अब घरेलू राजनीतिक एजेंडों से भी प्रभावित हो रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि इस समीक्षा का पनडुब्बी डील पर क्या प्रभाव पड़ता है।