सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर लगाई रोक, कोर्ट ने माना कि इनका हो सकता है दुरुपयोग, 2012 वाले नियम ही रहेंगे लागू.
नई दिल्ली। यूजीसी के नए नियमों को लेकर पूरे देश में मचे बवाल के बीच आज इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट में इन विनियमों को सामान्य वर्गों के विरुद्ध भेदभावपूर्ण होने के आधार पर चुनौती दी गई है। ऐसे में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगी दी। अब नए आदेश तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इन रिट याचिकाओं की सुनवाई कर रह है। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन के खिलाफ याचिकाएं मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ये नियम सामान्य वर्गों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया है.।चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच में मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि यूजीसी के नए नियम अस्पष्ट हैं और इसके दुरुपयोग का खतरा है। इसके बाद कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर स्टे लगा दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी।
चीफ जस्टिस ने आदेश देते हुए कहा कि 2012 के नियम फिर से लागू होंगे। शीर्ष अदालत ने कहा कि रेगुलेशन में जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं उनसे यह लगता है कि इस रेगुलेशन का दुरुपयोग किया जा सकता है। जस्टिस बागची ने कहा कि हम समाज में एक निष्पक्ष और समावेशी माहौल बनाने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब 3 E पहले से मौजूद है, तो 2C कैसे प्रासंगिक हो जाता है?
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुनवाई के दौरान कहा कि वो हम यूजीसी एक्ट की धारा 3( C) को चुनौती दे रहे हैं और ये असंवैधानिक है। सुनवाई के दौरान जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी देश जातियों के जंजाल से नहीं निकल पाया है तो वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने अमेरिका वाली स्थिति का जिक्र कर दिया। बागची ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि हम उस स्थिति तक नहीं पहुंचेंगे जहां अमेरिका की तरह अलग-अलग स्कूल हों जहां कभी अश्वेत और श्वेत बच्चों को अलग-अलग स्कूलों में पढ़ना पड़ता था।
कुछ जातियों के लिए अलग धारा की जरूरत नहीं
वकील ने सीजेआई सूर्यकांत से कहा कि मैं सेक्शन 3(c) पर रोक की मांग कर रहा हूं। यहां यह मान लिया गया है कि भेदभाव सिर्फ कुछ ही तबके के साथ हो सकता है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मान लीजिए कि कोई दक्षिण भारतीय छात्र उत्तर भारत के कॉलेज में आता है। यहां उस पर अनुचित टिप्पणी होती है तो क्या 3(e) में उस पर बात की गई है? वकील ने जवाब देते हुए कहा, 'जी हां। यही हमारा कहना है कि कुछ जातियों के लिए अलग से एक धारा बनाने की जरूरत नहीं थी।