पाकिस्तान में नया धार्मिक गठबंधन 'अहल-ए-सुन्नाह पाकिस्तान' बना सरकार के लिए चुनौती, टीएलपी ने दी चेतावनी.
पाकिस्तान में नया धार्मिक गठबंधन 'अहल-ए-सुन्नाह पाकिस्तान' बना सरकार के लिए चुनौती, टीएलपी ने दी चेतावनी
आने वाले दिनों में पाकिस्तान की सिरदर्दी और बढ़ने वाली है। देश के प्रमुख धार्मिक संगठनों में से एक तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) सहित कई धार्मिक समूहों ने मिलकर ‘अहल-ए-सुन्नाह पाकिस्तान’ नामक नया गठबंधन बनाया है।

यह गठबंधन मुरीदके नरसंहार को लेकर बेहद उग्र हो गया है और सरकार से कई मांगें रखी हैं। इन मांगों के पूरा न होने पर उन्होंने गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। दरअसल, मुरीदके में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा टीएलपी कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद से संगठन के समर्थकों में आक्रोश फैला हुआ है।
टीएलपी समर्थकों की रिहाई की मांग
इस नए गठबंधन की प्रमुख मांग है कि टीएलपी के सभी सदस्यों को तुरंत रिहा किया जाए।
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आतंरिक आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है।
इसके साथ ही, अफगानिस्तान के साथ संबंधों में तनाव बढ़ने से दोनों देशों के बीच संभावित सैन्य टकराव की आशंका भी गहराई है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा खतरा
अधिकारियों का कहना है कि टीएलपी के नेतृत्व वाला यह गठबंधन पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
इसे न केवल कई राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है, बल्कि प्रमुख धार्मिक नेताओं का भी समर्थन मिल रहा है — जो इसे और भी शक्तिशाली बना देता है।
टीएलपी का बढ़ता जनसमर्थन और विरोध की तैयारी
पिछले कुछ सप्ताहों में पूरे पाकिस्तान में टीएलपी के समर्थन में तेजी से वृद्धि हुई है।
22 अक्टूबर को होने वाली राष्ट्रीय बैठक के बाद देशभर में धरना-प्रदर्शन और रैलियों की योजना बनाई गई है।
पंजाब सहित कई प्रांतों में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इमरान खान का समर्थन और सुरक्षा तैयारियां
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सदस्यों को टीएलपी के प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लेने का निर्देश दिया है।
इससे राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है।
इस बीच, पंजाब सरकार ने धारा 144 लागू कर दी है, जिसके तहत सभी प्रकार के समारोहों, रैलियों और जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
हालांकि, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं, लेकिन भारतीय खुफिया अधिकारियों का मानना है कि यह विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले सकता है।
आंतरिक मोर्चे पर बढ़ते संकट
पाकिस्तान को बलूचिस्तान नेशनलिस्ट आर्मी (BLA) से भी कड़ी चुनौती मिल रही है, जबकि गुलाम कश्मीर में हालात पहले से ही तनावपूर्ण हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान के साथ नाजुक संबंधों के बीच अब पाकिस्तान को आंतरिक विद्रोह और धार्मिक उग्रवाद से एक नए मोर्चे पर जूझना पड़ेगा।