औरंगजेब विवाद के बीच बोले संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले-आक्रमणकारी मानसिकता वाले लोग भारत के लिए खतरा.
नई दिल्ली। औरंगजेब विवाद पर संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि आक्रमणकारी मानसिकता वाले लोग भारत के लिए खतरा हैं। हमें यह सोचना होगा कि बाहर से आने वालों को आदर्श बनाना है या स्थानीय नायकों को सम्मान देना है।
उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधी सभा का आज 23 मार्च को समापन हो गया। आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने आज प्रेस कान्फ्रेंस में कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत के जो विरोधी रहे हैं उनको आईकान नहीं बनाया जा सकता है। गंगा-जमुनी तहजीब की बात करने वाले लोग औरंगजेब के भाई दारा शिकोह को याद क्यों नहीं करते हैं? दिल्ली में औरंगजेब रोड को बदलकर अब्दुल कलाम रोड किया तो उसका कोई मतलब है न। तो जो हमारी संस्कृति की बात करेंगे, उसको हम लोग फॉलो करेंगे।
हम भाजपा के अभिभावक नहीं
भाजपा से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपाअध्यक्ष के लिए हमें कोई प्रचारक भेजने की मंशा नहीं है। सभी संगठन स्वतंत्र हैं और अपनी प्रक्रिया के तहत अपने अध्यक्ष चुनाव करने के लिए स्वतंत्र हैं। हसबोले ने कहा कि भाजपा में हमें लगता है कि सबकुछ ठीक चल रहा है। अगर हमें कुछ लगता है कि इस क्षेत्र में यह काम किया जाना चाहिए तो हम हमारी बात भी रखते हैं। बाकी हम भाजपा के अभिभावक नहीं हैं जो हम रोज उन्हें बताएं कि यह करो।
कहीं भी नहीं होना चाहिए घुसपैठ
बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ को लेकर उन्होंने कहा कि जब भी अवैध घुसपैठ होती है तो सरकार की जिम्मेदारी है कि इसे रोकने के लिए कदम उठाएं। बांग्लादेश हो या कहीं ओर से घुसपैठ हो, हम हमेशा कहते आए हैं कि यह नहीं होना चाहिए।
धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं
कर्नाटक में मुस्लिमों के आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के मुताबिक, धार्मिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। बाबा साहेब अंबेडकर भी यह नहीं चाहते थे। अगर कोई सरकार ऐसा करती है तो वह बाबा साहेब की मंशा के खिलाफ काम कर रही है। जातिगत जनगणना को लेकर उन्होंने कहा कि हमारे समाज में जाति-बिरादरी के हिसाब से आपस में झगड़े नहीं होने चाहिए। जब स्पार्ट्स में कोई मेडल आता है या फिर कोई सैनिक बॉर्डर पर शहीद होता है तो हम उसका धर्म-जाति नहीं देखते। हमें उन पर गर्व होता है। यही सद्भाव है।