वैश्विक ऑर्डर में बड़े बदलाव की ज़रूरत,संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की ज़रूरत पर बोले एस जयशंकर .
वैश्विक ऑर्डर में बड़े बदलाव की ज़रूरत,संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की ज़रूरत पर बोले एस जयशंकर
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की ज़रूरत पर बात करते हुए कहा है कि वैश्विक ऑर्डर में बड़े बदलाव की ज़रूरत है.दिल्ली में हो रहे रायसीना डायलॉग में उन्होंने चीन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसका विरोधी कोई पश्चिमी मुल्क नहीं है.उन्होंने कहा, दुनिया आज जिन मुश्किलों का सामना कर रहा है उनमें से अधिकतर पश्चिम की देन हैं लेकिन आज के वक्त में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों का सबसे बड़ा विरोधी कोई पश्चिमी मुल्क नहीं.

जयशंकर ने कहा कि जिस वक्त संयुक्त राष्ट्र बना था उस समय इसमें क़रीब 50 सदस्य थे लेकिन अब ये संख्या बढ़ कर चार गुना हो गई है, तो ये सामान्य बात है कि अब पहले की तरह काम नहीं हो सकता.बीते साल मई में चीन के वरिष्ठ राजनयिक वांग यी ने सुरक्षा परिषद में सुधारों और इसमें नए सदस्यों को शामिल करने का विरोध किया था.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच सदस्य हैं जिनके पास वीटो पावर है, चीन, फ्रांस, रूस, यूके और अमेरिका. इसके अलावा इसमें 10 और अस्थायी सदस्य हैं जिनका कार्यकाल दो साल का होता है.
वैश्विक ऑर्डर में बड़े बदलाव की ज़रूरत,संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की ज़रूरत पर बोले एस जयशंकर
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की ज़रूरत पर बात करते हुए कहा है कि वैश्विक ऑर्डर में बड़े बदलाव की ज़रूरत है.दिल्ली में हो रहे रायसीना डायलॉग में उन्होंने चीन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसका विरोधी कोई पश्चिमी मुल्क नहीं है.उन्होंने कहा, दुनिया आज जिन मुश्किलों का सामना कर रहा है उनमें से अधिकतर पश्चिम की देन हैं लेकिन आज के वक्त में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों का सबसे बड़ा विरोधी कोई पश्चिमी मुल्क नहीं.
जयशंकर ने कहा कि जिस वक्त संयुक्त राष्ट्र बना था उस समय इसमें क़रीब 50 सदस्य थे लेकिन अब ये संख्या बढ़ कर चार गुना हो गई है, तो ये सामान्य बात है कि अब पहले की तरह काम नहीं हो सकता.बीते साल मई में चीन के वरिष्ठ राजनयिक वांग यी ने सुरक्षा परिषद में सुधारों और इसमें नए सदस्यों को शामिल करने का विरोध किया था.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच सदस्य हैं जिनके पास वीटो पावर है, चीन, फ्रांस, रूस, यूके और अमेरिका. इसके अलावा इसमें 10 और अस्थायी सदस्य हैं जिनका कार्यकाल दो साल का होता है.