बिहार में एनडीए की सीटों का बंटवारा, भाजपा-जदयू को बराबर सीटें, चिराग न बुझे इसलिए दी ज्यादा सीटें, मांझी के मनसूबों पर फिरा पानी.
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए में सीटों का बंटवारा हो गया है। भाजपा और जदयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि चिराग पासवान की पार्टी को 29 सीटें दी गई हैं। 15 सीटें मांगने वाली जीतन राम मांझी की पार्टी हम को 6 सीटें दी गई हैं। इसी तरह रालोमो को भी 6 सीटें दी गई हैं।
केंद्रीय मंत्री और बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर पोस्ट कर इस फॉर्मूले की आधिकारिक जानकारी दी है। धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि एनडीए में भाजपा और जदयू दोनों को 101-101 सीटें मिली हैं। पिछले काफी समय से रुठने-मानने का खेल कर रहे चिराग पासवान फायदे में रहे। वे 29 सीटें लेने में कामयाब हुए, जबकि 15 से अधिक सीटों की मांग पर अड़े जीतनराम मांझी का सपना पूरा नहीं हुआ। उन्हें मात्र 6 सीटों से ही संतुष्ट होना पड़ा, हालांकि वे संतुष्टि का भाव उनके चेहरे पर दिखाई नहीं दे रहा है।
एक सांसद सीट के बदले छह सीटें
बताया जाता है कि इस बार सीट बंटवारे में एक नया फार्मूला अपनाया गया है। एक सांसद सीट के बदले छह विधानसभा सीटें दी गई हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान को पांच सांसदों के आधार पर 29 सीटें मिली हैं। उपेंद्र कुशवाहा की रालोजपा को एक सांसद के आधार पर छह सीटें मिली हैं, जबकि जीतन राम मांझी की हम पार्टी को भी एक सांसद वाले फार्मूले पर छह सीटें दी गई हैं।
जदयू की सीटें घटीं, खामोश रहे नीतीश
इस बार सीट बंटवारे में जदयू के नीतीश कुमार को समझौता करना पड़ा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जदयू ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन मात्र 43 सीटें जीतने में सफल रही थी। इसलिए नीतीश कुमार इस बार ज्यादा सौदेबाजी नहीं कर पाए और 14 सीटें घटने के बाद भी खामोश रहे। पिछले चुनाव में भाजपा ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन 78 सीटें जीतने के बाद भी उसने अपनी सीटें कम कर सहयोगी दलों के लिए सीटों का इंतजाम किया।
मांझी बोले-हमारी ताकत को कम आंका गया
सीटों के बंटवारे पर अवाम हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के मुखिया जीतन राम मांझी संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एनडीए में हमारी ताकत को कम आंका गया है और एनडीए को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। मांझी ने ये भी कहा कि आलाकमान ने जो फैसला किया है वो सिर माथे पर है, लेकिन हम सिर्फ छह सीटें देकर उन्होंने हमारे महत्व को कम आंका है।